Sunday, January 18, 2009
मैंने भी देखा
तुम भूख से मर गए कोई बात नही उनके जुखाम के भी समाचार हो गए यह बात उतनी ही जो मंजर मैंने देखा सड़क पर तड़पता एक अस्सी साल का बूढा जिश्के पूरे सरीर पर घाव थे हर कोई मदद करना चाह रहा था पर किसी ने हिमत नही उठाई सभी की आंखों मैं दया का भाव था वहां मैं भी था पर अपनी हिचक ओउर लोग क्या कहेंगे इस चक्कर मैं मैंने भी अंदरूनी शाहंबूती ही दिखाई मैं आज भी शार्मिंदा हूँ
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